जरूरी नहीं है कि एक डिप्रेशन पीड़ित व्यक्ति के भीतर यह सारे बदलाव नजर आएं, लेकिन आकपो स्वयं में इनमें से चार या पांच लक्षण भी नजर आते हैं तो यह गंभीर अवसाद |की ओर इशारा करते हैं। इस स्थिति में व्यक्ति को तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है। आज की भागदौड़ भरी जिन्दगी और तनाव का आपस में गहरा नाता हो गया है। बच्चा हो या बूढ़ा, हर व्यक्ति किसी न किसी तरह के तनाव से गुजर रहा है। कुछ हद तक तनाव होना सामान्य है, लेकिन अगर तनाव आपके जीवन पर हावी होने लगता है तो डिप्रेशन में तब्दील हो जाता है। कुछ लोग गंभीर अवसाद को भी सामान्य तनाव मानकर नजरअंदाज करते हैं, जिससे स्थिति बद से बदतर होती चली जाती है। ऐसे में जरूरी है कि आप समय रहते अवसाद के लक्षणों को पहचानें और इससे बाहर निकलने के उपाय खोजें जरूरी नहीं है कि एक डिप्रेशन पीड़ित व्यक्ति के भीतर यह सारे बदलाव नजर आएं, लेकिन आकपो स्वयं में इनमें से चार या पांच लक्षण भी नजर आते हैं तो यह गंभीर अवसाद की ओर इशारा करते हैं। इस स्थिति में व्यक्ति को तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है। गंभीर अवसाद होने |पर कुछ लोगों में शारीरिक लक्षण भी नजर आते हैं। मसलन, ऐसे लोगों को पेट में दर्द, सिरदर्द व पाचन समस्याएं होना आम है। वहीं बच्चों व टीन्स में भी लक्षणों के आधार पर अवसाद को पहचाना जा सकता है। छोटे बच्चों व टीन्स में उदासी, नींद की समस्या, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी व |भूख की समस्या, स्कूल परफार्मेस में गिरावट देखी जाती है। दो सप्ताह से अधिक लक्षण हमेशा उदास व चिंतित महसूस करना मन में निराशावादी विचारों का संचार खुद को दोषी, बेककार व असहाय महसूस करना मनपसंद चीजों को भी करने में मन न लगना एकाग्रता में कमी व निर्णय लेने में परेशानी बहुत अधिक व बहुत कम सोना भूख में परिवर्तन वजन का बढ़ना व कम होना बैचेनी व चिड़चिड़ाहट महसूस होना मन में अक्सर आत्महत्या या मरने का विचार आना सोशल लाइफ से दूर हो जाना परिवार व दोस्तों से दूरी बनाना शराब व नशीली दवाओं का अत्यधिक सेवन
इन संकेतों से पहचानें अवसाद के लक्षणों को, न करें नजरअंदाज